हाँ, रोमियों 6:6 को विश्वासियों के लिए एक आत्मिक "मृत्यु प्रमाणपत्र" के रूप में समझा जा सकता है। इस पद में प्रेरित पौलुस घोषणा करते हैं कि विश्वासी का "पुराना मनुष्य" (उसका पुराना स्वभाव, जो पाप का दास था) मसीह के साथ क्रूस पर चढ़ाया गया।
रोमियों 6:6 का अर्थ. न्यू अमेरिकन स्टैंडर्ड बाइबल (NASB) के अनुसार: "क्योंकि हम जानते हैं कि हमारा पुराना मनुष्य उसके साथ क्रूस पर चढ़ाया गया, ताकि पाप का शरीर निष्प्रभावी हो जाए और हम आगे से पाप के दास न रहें।"
यह "मृत्यु प्रमाणपत्र" व्यवहारिक रूप से क्या दर्शाता है?
1. पुराना मनुष्य मर चुका है।
यह उस पुरानी पहचान की ओर संकेत करता है जो पाप के बंधन में थी। जैसे एक मृत व्यक्ति अपने पुराने जीवन के प्रति कोई प्रतिक्रिया नहीं देता, वैसे ही आपका पुराना स्वभाव पाप के कानूनी अधिकार से मुक्त हो चुका है।
2. मसीह के साथ क्रूस पर चढ़ाया गया।
आपकी पाप के प्रति मृत्यु सीधे यीशु मसीह की क्रूस पर हुई मृत्यु से जुड़ी हुई है। यह एक बीती हुई, पूर्ण और समाप्त घटना है। यह आत्मिक "मृत्यु प्रमाणपत्र" पहले ही जारी किया जा चुका है।
3. पाप की दासता से स्वतंत्रता।
इस आत्मिक मृत्यु का उद्देश्य यह है कि अब आप पाप के दास नहीं रहे। पाप अब आपका स्वामी नहीं है और उसे आप पर अधिकार नहीं है।
इस "मृत्यु प्रमाणपत्र" को जीवन में कैसे लागू करें?
यद्यपि परमेश्वर ने इस आत्मिक सत्य को पूर्ण रूप से सिद्ध कर दिया है, फिर भी विश्वासियों को इसे अपने दैनिक जीवन में लागू करने की आज्ञा दी गई है।
1. अपने आप को पाप के लिए मरा हुआ मानो।
रोमियों 6:11 में पौलुस कहते हैं, "अपने आप को पाप के लिए मरा हुआ, परन्तु मसीह यीशु में परमेश्वर के लिए जीवित समझो।"
अर्थात् अपनी भावनाओं के आधार पर नहीं, बल्कि परमेश्वर के वचन के सत्य के आधार पर जीवन जीओ।
2. पाप को अपने ऊपर राज्य न करने दो।
क्योंकि अब आपको नया आत्मिक स्वभाव मिला है, इसलिए आपको पापमय इच्छाओं की आज्ञा मानने की आवश्यकता नहीं है। अपने शरीर को अधर्म का साधन न बनाकर, परमेश्वर के लिए धार्मिकता का साधन बनाकर प्रस्तुत करें।
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