"सबने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित हैं" (रोमियों 3:23) यह कथन बाइबिल में एक आधारभूत अवधारणा है, जो इस बात पर जोर देता है कि सभी को परमेश्वर की कृपा और क्षमा की आवश्यकता है, और मृत्यु पाप का परिणाम है, स्वर्ग में जाने में बाधा नहीं है, बल्कि यीशु मसीह में विश्वास के माध्यम से स्वर्ग तक पहुँचने का मार्ग है।
यहाँ एक अधिक विस्तृत
व्याख्या दी गई है!
सार्वभौमिक पाप:
रोमियों 3:23 में आयत, "क्योंकि सबने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित हैं," पाप की विश्वव्यापी प्रकृति पर प्रकाश डालती है, जिसका अर्थ है कि कोई भी व्यक्ति परमेश्वर की दृष्टि में स्वाभाविक रूप से धर्मी या परिपूर्ण नहीं है।
क्षमा की आवश्यकता:
यह समझ क्षमा और छुटकारे की आवश्यकता को रेखांकित करती है, क्योंकि सभी लोग परमेश्वर की पवित्रता के मानक से रहित हैं।
ईश्वर की कृपा:
निम्नलिखित आयत (रोमियों 3:24) यीशु मसीह में विश्वास के माध्यम से अनुग्रह द्वारा औचित्य की अवधारणा का परिचय देती है, जो परमेश्वर के साथ मेल-मिलाप का मार्ग प्रस्तुत करती है।
मृत्यु और अनन्त जीवन: जबकि मृत्यु पाप का परिणाम है (रोमियों 6:23), परमेश्वर का बचन बाइबल में यीशु मसीह में विश्वास के माध्यम से अनन्त जीवन का वादा करता है, यीशु मानवता के पापों का प्रायश्चित करने के लिए मर गया।
मोक्ष: मोक्ष अच्छे कर्मों या नियमों का पालन करने से नहीं मिलता है, बल्कि यह ईश्वर की ओर से एक मुफ्त उपहार है, जो यीशु मसीह में विश्वास के माध्यम से प्राप्त होता है।
स्वर्ग में बाधा नहीं: इसलिए, एक आस्तिक की मृत्यु स्वर्ग में बाधा नहीं है, बल्कि ईश्वर की उपस्थिति में एक प्रवेश करना का रास्ता है।
विश्वास का महत्व: बाइबल मोक्ष और अनन्त जीवन के लिए यीशु मसीह में विश्वास के महत्व पर जोर देती है।
स्वर्ग जाने का कोई दूसरा रास्ता नहीं है मसीह में पाप से मुक्त ही हे स्वर्ग में जया जा सकता है 🙏
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